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30.12.18

जाड़े की धूप

आज मैंने भी तुमसे खूब प्यार किया
आज तुमने भी मेरा खूब साथ दिया।

छत पर चढ़ा तो झट से लिपट गई मुझसे
थोड़ा ठहरा तो जी भर के मुझे गर्म किया।

पँछी आते हैं, चुगते हैं औ चहकते भी हैं!
एक छुट्टी में, हमने भी ये महसूस किया।

पत्नी ने पाल रख्खे हैं गमलों में कई पौधे
इक गुलाब को हँसकर मैंने आदाब किया।

इस घाट से उस घाट तक चला शाम तलक
आज घण्टों माँ गङ्गा का दीदार किया।

एक कुतिया ने मढ़ी में जने थे कई पिल्ले
कुछ मूर्तियाँ थीं, झुककर, नमस्कार किया।

जाड़े की धूप! तू साए की तरह थी दिनभर
आज तुमने भी मुझसे खूब प्यार किया।
................

20.12.15

जाड़े वाला प्यार


घने कोहरे से लड़कर
लाया हूँ
तुम्हारे लिए
एक मुठ्ठी
जाड़े की धूप
तुम अपनी मॉर्निंग
गुड कर लो।
चलता हूँ काम पर
आऊँगा शाम ढले
जेब में भरकर
मूँगफली
झोले में भरकर
आलू, छिम्मी, टमाटर, आदी, और….
हरी मिर्च भी
ठंड बढ़ रही है
हाँ!
याद आया
छत पर रख्खी तो हैं तुमने सहेजकर
आम की सूखी लकड़ियाँ
मंगा लेना
दूध वाले यादव जी के घर से
दो-चार सूखी गोहरी
जलाना बोरसी
सेकेंगे हाथ
हम सब
मिल बैठकर
तुम्हें पता है?
बहुत अच्छा बनाती हो तुम
छिम्मी भरे पराठे,
टमाटर की मीठी चटनी
और...
अदरक वाली चाय।
…........................
.....देवेन्द्र पाण्डेय।