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31.12.19

नववर्ष की शुभकामनाएँ

शुभकामनाएँ मुझे
कि कुरुक्षेत्र में भी
ढूँढता रहूँ
सुख के द्वार
हरपल
मिलता रहे आनन्द

शुभकामनाएँ तुम्हें
कि सदा खुश रहो तुम भी
शेयर करूँ तुमसे
आनन्द के पल
तो तुम्हें
और भी खुशी मिले

शुभकामनाएँ मजदूरों को
कि हर दिन
मिलता रहे काम
शुभकामनाएँ मालिकों को
लाभ हो इतना
कि बाँट सकें, बोनस भी

शुभकामनाएँ किसानों को
रहने के लिए
झोपड़ी
ओढ़ने के लिए
पूस की रात में कम्बल
और..
खाने के लिए रोटी से आगे बढ़े
उनकी गाड़ी
मिल सके
उपज का उचित मूल्य

शुभकामनाएँ गुरुजन को
सफल हों विद्यार्थी
शुभकामनाएँ विद्यार्थियों को
काम आए डिग्रियाँ

शुभकामनाएँ उन पंछियों को
जिनके घोसले
विकास ने उजाड़ दिए
शुभकामनाएँ
लुप्त हो रही सभी नदियों को

शुभकामनाएँ उन मछेरों को
जो तूफानों में भी
खोल देते हैं अपनी कश्तियाँ

शुभकामनाएँ देश के सभी
वीर सैनिकों को
जिनके कारण हम
फहरा पाते हैं
तिरँगा,
सिपाहियों को
जिनके कारण हम
रहते हैं सुरक्षित

शुभकामनाएँ
सभी साहित्यकारों को
जो हो पाए प्रकाशित,
उनको भी
जो लिखते हैं निरन्तर
बिना प्रकाशित हुए
और उन प्रकाशकों को भी
जो लाभ के साथ
समझते हैं
प्रकाशक का धर्म

शुभकामनाएँ फिल्मी कलाकारों को
और उनको भी
जो नहीं हैं फिल्मी लेकिन
कलाकार हैं

शुभकामनाएँ
क्रिकेट के सभी खिलाड़ियों को
और उनको भी
जो नहीं हैं
क्रिकेट के खिलाड़ी

शुभकामनाएँ देश के सभी नेताओं को
जिन्होंने समर्पित कर दिया है
हमारी भलाई के लिए
अपना जीवन
करते हैं रहते हैं संघर्ष
सड़क से संसद तक और..
टी.वी. पर भी!

नववर्ष की शुभकामनाएँ
उन सभी को
जिनके कारण
आनन्द से कट रहा है
हमारा जीवन।
....@देवेन्द्र पाण्डेय।

31.3.14

नववर्ष।


हाड़ कंपाने वाली ठंड में
सूट-बूट पहनकर
ए.सी. में बैठकर
इस्की-व्हिस्की चढ़ाकर
किसी को हलाल कर
ओटी-बोटी चाभ कर
नाचते-झूमते
संपन्नता की नुमाइश करने के लिए आता है
अंग्रेजी नववर्ष।


बर्गर, पिज़्जा या फिर
टमाटर की चटनी के साथ
आलू या छिम्मी का परोंठा खा कर
मोबाइल में मैसेज भेज कर
देर रात तक जाग-जाग कर
टी.वी. में
सपने देखता
बजट बिगाड़ता
आज की नींद
कल की सुबह खराब करता 
मध्यमवर्ग
तब चौंकता है
जब हैप्पी न्यू ईयर कहकर
मुँह चिढ़ाते हुए 
भाग जाता है
अंग्रेजी नववर्ष।

अथक परिश्रम के बाद
जब गहरी नींद में
सो रहा होता है
मजदूर, किसान
मध्य रात्रि में
चोरों की तरह आता है
अंग्रेजी नववर्ष।

सूर्योदय की स्वर्णिम आभा बिखेरता
पंछियों के कलरव से चहचहाता
गेहूँ की लहलहाती बालियों में
सोना उगलते
बौराये आमों, गदराये फलों, खिलते फूलों
झर झर झरते पुराने,
फर फर हिलते नये कोमल पत्तों के बीच
वसंत के गीत गाता
नई उर्जा का संचार करता
जन-जन को
गहरी नींद से जगाता
हँसते हुए आता है
भारतीय नववर्ष।

सृष्टि का प्रथमदिवस
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
नवसंवत्सर!
इसके आते ही
सुनाई देती है
उजाले की हुँकार
होने लगता है
अंधेरे का पलायन
दिन बड़े,
छोटी होने लगती हैं रातें
भरने लगते हैं
अन्न के भंड़ार
गरीब क्या,
मिलने लगते हैं दाने
पंछियों को भी!

नवदुर्गा का आह्वाहन
व्रत, तप, संकल्प और जयघोष के साथ
शुरू होता है
भारतीय नववर्ष।

…………………………………..

30.3.14

नवसंवत्सर


पत्ते झड़ते
झर झर झर
मन करे उड़ूँ 
फर फर फर
पूजा की थाली
डगर-डगर
क्या तेरा घर
क्या मेरा घर
नवसंवत्सर! नवसंवत्सर!

सोने-सी बाली
गेहूँ की
रक्तिम आभा है
गुड़हल की
समृद्ध धरा
हर्षित अम्बर
नवसंवत्सर! नवसंवत्सर!

कोहरे का सपना चूर हुआ
अंधकार अब दूर हुआ
चैत्र शुक्ल की प्रतिप्रदा
हँस कर निकल रहे दिनकर
दूज का चाँद तैयारा खड़ा
स्वागत करने को जमकर
नवदुर्गा का आह्वान
जय घोष कर रहा गगन
यह सृष्टि का प्रथम दिवस
विक्रमादित्य का विजय समर
मन क्यों न खुशी से पागल हो !
झूमे, नाचे, हर हर हर
नवसंवत्सर! नवसंवत्सर!


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आप सभी को गुड़ी पड़वा और नवसंवत्सर की पूर्व संध्या पर ढेर सारी शुभकामनाएँ, हार्दिक बधाई। नववर्ष मंगलमय हो।