हे कृष्ण!
आज भी हैं कालिया नाग
आज भी दरिद्र हैं
सुदामा पाण्डे
महुअर का मंत्र फूँक
कुछ नई लीला कर।
आज भी हैं कालिया नाग
आज भी दरिद्र हैं
सुदामा पाण्डे
महुअर का मंत्र फूँक
कुछ नई लीला कर।
मैं भुने चने लेकर चढ़ जाऊँ डाल पर?
तू आयेगा भूखा-प्यासा?
पूछेगा?
क्या खा रहे हो यार!
तू आयेगा भूखा-प्यासा?
पूछेगा?
क्या खा रहे हो यार!
आ!
मैं झूठ नहीं बोलुँगा
खा लेना
जितना जी चाहे।
मैं झूठ नहीं बोलुँगा
खा लेना
जितना जी चाहे।
न जाने कब से
डूबी हुई है
बच्चों की गेंद
एक नहीं,
अनेक हैं कालिया नाग
हवा में तैरती
उफनाई नदी में
डूबी हुई है
बच्चों की गेंद
एक नहीं,
अनेक हैं कालिया नाग
हवा में तैरती
उफनाई नदी में
आ कृष्ण आ!
चावल के दाने के दिन गये
मित्रता संकट में है
बहने भी
घबड़ाई हुई हैं।
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चावल के दाने के दिन गये
मित्रता संकट में है
बहने भी
घबड़ाई हुई हैं।
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