1.12.13

मैं अकेला हूँ !



नौकरी से बंधा हूँ
घर छोड़
शहर के एक छोटे से कमरे की चौकी पर पड़ा हूँ
मैं अकेला हूँ!

जिस्म जिंदा है
इसका प्रमाण
हवा में उड़ते मच्छर हैं
जो रगों में दौड़ते
लहू से बंधे हैं।

कमरे में
रोशनदान के पास
मकड़ी के जाले हैं
जाले से
कीट-पतंगे
कीट-पतंगों से छिपकली बंधी है

आदमी के पेट में नहीं
जमीन पर
चूहे दौड़ते हैं
चूहों का अपना पेट, अपनी भूख होती है
इस सच के अलावा
मेरे गले में
एक बड़ा-सा झूठ बंधा है
मैं अकेला हूँ!

………………………….

25 comments:

  1. कहाँ अकेले रहते हैं हम?
    अपने से सब दिखते रहते,
    मूक रहे वैश्विक संबोधन,
    शुष्क व्यवस्था और हृदय नम,
    कहाँ अकेले रहते हैं हम?

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  2. आप की ये सुंदर रचना आने वाले सौमवार यानी 02/12/2013 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित है...
    सूचनार्थ।

    एक मंच[mailing list] के बारे में---

    अपनी किसी भी ईमेल द्वारा ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजकर जुड़ जाईये आप हिंदी प्रेमियों के एकमंच से।हमारी मातृभाषा सरल , सरस ,प्रभावपूर्ण , प्रखर और लोकप्रिय है पर विडंबना तो देखिये अपनों की उपेक्षा का दंश झेल रही है। ये गंभीर प्रश्न और चिंता का विषय है अतः गहन चिंतन की आवश्यकता है। इसके लिए एक मन, एक भाव और एक मंच हो, जहाँ गोष्ठिया , वार्तालाप और सार्थक विचार विमर्श से निश्चित रूप से सकारात्मक समाधान निकलेगे इसी उदेश्य की पूर्ति के लिये मैंने एकमंच नाम से ये mailing list का आरंभ किया है। आज हिंदी को इंटरनेट पर बढावा देने के लिये एक संयुक्त प्रयास की जरूरत है, सभी मिलकर हिंदी को साथ ले जायेंगे इस विचार से हिंदी भाषी तथा हिंदी से प्यार करने वाले सभी लोगों की ज़रूरतों पूरा करने के लिये हिंदी भाषा , साहित्य, चर्चा तथा काव्य आदी को समर्पित ये संयुक्त मंच है। देश का हित हिंदी के उत्थान से जुड़ा है , यह एक शाश्वत सत्य है इस मंच का आरंभ निश्चित रूप से व्यवस्थित और ईमानदारी पूर्वक किया गया है। हिंदी के चहुमुखी विकास में इस मंच का निर्माण हिंदी रूपी पौधा को उर्वरक भूमि , समुचित खाद , पानी और प्रकाश देने जैसा कार्य है . और ये मंच सकारात्मक विचारो को एक सुनहरा अवसर और जागरूकता प्रदान करेगा। एक स्वस्थ सोच को एक उचित पृष्ठभूमि मिलेगी। सही दिशा निर्देश से रूप – रेखा तैयार होगी और इन सब से निकलकर आएगी हिंदी को अपनाने की अद्भ्य चाहत हिंदी को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाना, तकनिकी क्षेत्र, विज्ञानं आदि क्षेत्रो में विस्तार देना हम भारतीयों का कर्तव्य बनता है क्योंकि हिंदी स्वंय ही बहुत वैज्ञानिक भाषा है हिंदी को उसका उचित स्थान, मान संमान और उपयोगिता से अवगत हम मिल बैठ कर ही कर सकते है इसके लिए इस प्रकार के मंच का होना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हमारी एकजुटता हिंदी को फिर से अपने स्वर्ण युग में ले जायेगी। वर्तमान में किया गया प्रयास , संघर्ष , भविष्य में प्रकाश के आगमन का संकेत दे देता है। इस मंच के निर्माण व विकास से ही वो मुहीम निकल कर आयेगी जो हिंदी से जुडी सारे पूर्वग्रहों का अंत करेगी। मानसिक दासता से मुक्त करेगी और यह सिलसिला निरंतर चलता रहे, मार्ग प्रशस्त करता रहे ताकि हिंदी का स्वाभिमान अक्षुण रहे।
    अभी तो इस मंच का अंकुर ही फुटा है, हमारा आप सब का प्रयास, प्रचार, हिंदी से स्नेह, हमारी शक्ति तथा आत्मविश्वास ही इसेमजबूति प्रदान करेगा।
    ज आवश्यक्ता है कि सब से पहले हम इस मंच का प्रचार व परसार करें। अधिक से अधिक हिंदी प्रेमियों को इस मंच से जोड़ें। सभी सोशल वैबसाइट पर इस मंच का परचार करें। तभी ये संपूर्ण मंच बन सकेगा। ये केवल 1 या 2 के प्रयास से संभव नहीं है, अपितु इस के लिये हम सब को कुछ न कुछ योगदान अवश्य करना होगा।
    तभी संभव है कि हम अपनी पावन भाषा को विश्व भाषा बना सकेंगे।


    एक मंच हम सब हिंदी प्रेमियों, रचनाकारों, पाठकों तथा हिंदी में रूचि रखने वालों का साझा मंच है। आप को केवल इस समुह कीअपनी किसी भी ईमेल द्वारा सदस्यता लेनी है। उसके बाद सभी सदस्यों के संदेश या रचनाएं आप के ईमेल इनबौक्स में प्राप्त कर पाएंगे कोई भी सदस्य इस समूह को सबस्कराइब कर सकता है। सबस्कराइब के लिये
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    Replies
    1. धन्यवाद। फुर्सत मिलते ही साझा होने का प्रयास करूंगा अभी नेट से सप्ताह में दो चार घंटे ही जुड़ पाता हूँ।

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  3. बहुत सुंदर उत्कृष्ट रचना ....!
    ==================
    नई पोस्ट-: चुनाव आया...

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  4. केले सा जीवन जियो, मत बन मियां बबूल |
    सामाजिक प्रतिबंध कुल, दिल से करो क़ुबूल |

    दिल से करो क़ुबूल, अन्यथा खाओ सोटा |
    नहीं छानना ख़ाक, बाँध कर रखो लंगोटा |

    दफ्तर कॉलेज हाट, चौक घर मेले ठेले |
    रहो सदा चैतन्य, घूम मत कहीं अकेले |

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  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  6. ए पांडे जी! आप त हमरा व्यथा बयान कर दिए हैं.. आजकल ओही फेज से हम भी गुजर रहे हैं.. ई कविता छपवाकर दीवाल पर टांग देते हैं!! जय हो!!

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    1. यकीन कीजिए.. मैं अकेला हूँ ! लिखते वक्त आपका और हम जैसे बहुतों की याद साथ-साथ थी।

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  7. सच कहा...कहाँ अकेले हैं आप...मच्छर, मकड़ी, चूहे...और कविता का साथ तो है ही...

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  8. अकेले हैं तो क्या ग़म है,
    कीड़े मकौड़े क्या कम हैं !

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  9. अकेलेपन से निकलना होगा !

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  10. बहुत सुंदर..... गहन भावपूर्ण प्रस्तुति .....

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  11. गजानन माधव मुक्तिबोध की राह पर चल पड़े हैं। ....

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  12. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (02-112-2013) को "कुछ तो मजबूरी होगी" (चर्चा मंचःअंक-1449)
    पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  13. ये अकेलापन...
    अकेलेपन की यह व्यथा...
    ये हम सभी की ही व्यथा है...!
    ...a feeling so easy to identify it... well penned!

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  14. घर से दूर यह अकेलापन। कविता ऐसे भुक्तभोगियों की व्यथा बयान करती है !

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  15. मैं अकेला हूँ -

    नहीं बंधा हूँ किसी के प्रेम से -

    क्योंकि इस जगती के प्रेम हद के हैं -

    बेहद के प्रेम की तलाश में अकेला हूँ।

    सुन्दर रचना संसार और रूपक है आधुनिक जीवन का।

    नौकरी से बंधा मैं अपने से ही दूर हूँ -

    कितना मजबूर हूँ।

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  16. आदमी सदा अकेला ही है । यही उसकी नियति है । हाँ, इसे स्वीकार करना कठिन है |

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  17. पाण्डेय जी आजकाल शहर में तो सब अकेले है ,कोई किसी को नही पहचानते हैं !कमाल का शहर है !
    नई पोस्ट वो दूल्हा....

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  18. मैं अकेला हूँ ... यूं तो हर कोई अकेला है आज के दौर में ... पर किसी दूसरे अकेले को साथ बनाइये ...

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  19. कल 04/12/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  20. ओह .....भावुक अभिव्यक्ति

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  21. सच इंसान कभी अकेला रहता ही नहीं है .... ..आस-पास कितना कुछ रहता है फिर अकेले कैसे .....
    बहुत सुन्दर बिम्ब प्रस्तुत किया है आपने ....

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  22. मछ्छर,मकड़ी,छिपकली और चूहों का साथ है,कोई प्यार करने वाला भी नहीं ,शिकायत करने वाला भी नहीं !

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