14.12.14

ईश्वर!


हे ईश्वर!

कड़ाकी ठण्ड में
कैसा है रे तू?
गरम पानी
मिलता है क्या नहाने को?

मैं तो
रजाई में दुबका
फेसबुक का मजा ले रहा हूँ
चुटकुले पढ़ रहा हूँ
तू?
चैन से सोया है न!


धरती, आकाश, आग, हवा,पानी
सूर्य, चन्द्र, ग्रह, नक्षत्र.....
इतना सब दिया तूने
कि आज तक
ठीक-ठीक जान भी नहीं पाया
कितना दिया तूने!

न मागने की आदत गई
न भूख मिटी
किसी ने सही कहा है-
भिखारियों को जितना भी दो
रहेंगे भिखारी ही।


हमारे मांगने से परेशान मत हो
कोई तकलीफ हो
तो लिख
पूरी कोशिश करूँगा
कि तेरा कष्ट
दूर हो।

आदमी हूँ
पुरखों का नाता है
बेवफाई नहीं करूँगा
निश्चिन्त रह।

जहाँ भी है
खुश रह
मस्त रह।

11 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवार के - चर्चा मंच पर ।।

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  2. मस्त है वो मुझे बताया था आपको भी बता दिया खुश रहिये :)

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  3. आज कल ईश्वर को ए. सी., कूलर शॉल, स्वेटर सब कुछ मिलता है, भक्त बड़ा ध्यान रखते हैं भगवान का … बहुत खुश है, मस्त है वो आप बिलकुल चिंता ना करें :)

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  4. दूसरा व तीसरा पद काफी अच्छा लगा .

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  5. सब तरफ उसी की कृपा से संभव हो रहा है ....
    बहुत बढ़िया

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  6. सब उलट-पुलट कर दिया आपने?

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