10.10.16

मैं मार्निंग वॉक पर था.

धूप
अभी आई नहीं थी धरती पर
प्यास
अचकचा कर जगी और
दौड़ने लगी

पंछी दाने के लिए
चौपाये
चारे के लिए
मनुष्य
अपने और पालतू पेट के लिए
घरों से निकलने लगे

दूसरे भी नज़ारे थे
कोई तेज-तेज चल रहा था
कोई दौड़ रहा था
और कोई
अजीब-अजीब आवाजें निकालते हुए
रह-रह कर
दोनों हाथ हवा में
लहरा रहा था
यह भूखे-प्यासे की नहीं
खाये, पीये, अघाये लोगों की दौड़ थी
मगर इनमें भी
कोई तृप्त नहीं था

उस प्यास की
कोई एक मूरत होती तो
तस्वीर खींच कर
दिखा देता
मेरे हाथ में कैमरा था
मैं मार्निंग वॉक पर  था.

15 comments:

  1. दो कैमरे एक साथ चला लेना वाकई में गजब है
    एक हाथ से एक दिमाग से :)

    सुन्दर ।

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  2. बहुत सुन्दर .

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  3. यह प्यास कैमरे में कहाँ कैद होती है, कलम की रेखाओं में ही यह जीती है

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  4. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (11-10-2016) के चर्चा मंच "विजयादशमी की बधायी हो" (चर्चा अंक-2492) पर भी होगी!
    श्री राम नवमी और विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. ज्यादा देखना सेहत के लिए खराब है.... खास कर तब, जब आप सेहत बनाने के लिए मॉर्निंग वॉक पर निकले हों!

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  6. वाह जी बहुत अच्छे सुबह की सैर में दो दो अलग अलग नज़ारे , क्या बात है भई वाह बहुत बढ़िया देवेन्द्र भाई | गहरी बात

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  7. बहुत बढ़िया

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  8. अब इसके बाद कहाँ कुछ बाकी रह जाता है दिखाने को... वैसे भी आपका कैमरा ये सब देखने के अलावा भी बहुत कुछ देखता है जो देखने योग्य होता है!

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  9. प्यास किसके रोके रूकती है ... और अगर केमरा होता तो आप शायद कैद न कर पाते उसे ... तेज़ रफ़्तार है जमाने की प्यास की ...

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  10. मार्निंग वाक और कैमेरा और फिर आपके कैमरे आँख बहुत तेज है

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