1.2.17

बसंत

माचिस ढूँढ कर रखना
उजाले में
सुना है
भड़क कर जलती है
लौ
बुझने से पहले

हौसला
बचा कर रखना
अँधेरे में
यूँ ही
डराती रहती हैं
काली रातें
सुबह से पहले
सांसें
चलती रहें
ठंडी हवा में भी
सुना है
बर्फ बन
भहरा कर गिरता है
जाड़ा
बसंत से पहले।
….......................

13 comments:

  1. सुन्दर रचना ...
    वसंत पंचमी की शुभकामनाएं

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  2. दिनांक 02/02/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद... https://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
    आप भी इस प्रस्तुति में....
    सादर आमंत्रित हैं...

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 02-02-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2588 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  4. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन - बसंत पंचमी में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  5. पचपन साल के पेज पर टिप्पणी बाक्स नहीं खुल पा रहा है । यहीं दे दे रहा हूँ टिप्पणी । बहुत सुन्दर और सटीक बात :)

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    1. आभार। mobile blogging thee. Coment box khol naheen paaya.

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    2. आभार। mobile blogging thee. Coment box khol naheen paaya.

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