19.2.17

प्रेम

खामोश हो गईं
शाख पर बैठीं
चिड़ियाँ

शरमा कर
सिंदूरी हो गई
सरसों के पीले फूलों पर
दिनभर खेलती
धूप

आपस में नहीं मिलते
चाँद और सूरज
सुबह औ शाम
मगर दिखता है
धरती पर
प्रेम ।

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन भवानी प्रसाद मिश्र और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  3. क्या बात है ... प्रेम है इसलिए हूप भी पीली से लाल हो जाती है ...

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 23-02-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2597 में दिया जाएगा |
    धन्यवाद

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