24.8.18

सत्ता

चांद
दिन में
सूरज से
कोई प्रश्न नहीं करता
जानता है
सही वह
जिसके पास है
सत्ता।

सूरज
रात में 
चांद पर रोशनी लुटा कर 
मौन हो जाता है
जानता है
सही वह
जिसके पास है
सत्ता।

आम आदमी 
चिड़ियों की तरह
चहचहाता है..
वो देखो
चांद डूबा,
वो देखो
सूर्य निकला!
वो देखो
सूर्य डूबा,
वो देखो
चांद निकला!
......

11 comments:

  1. बढ़िया। अब शायद कुछ बदलाव आयेगा पाँच साल चाँद दिखेगा सूरज गायब हो जायेगा ।

    ReplyDelete
  2. सभी बदलाव सुखद नहीं होते..

    ReplyDelete
  3. आपकी लिखी रचना सोमवार २३ मई 2022 को
    पांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    संगीता स्वरूप

    ReplyDelete
  4. आम आदमी चिड़ियों की तरह फड़फड़ाता है

    बहुत अच्छी और सुंदर रचना

    ReplyDelete
  5. आम आदमी
    चाँद और सूरज के पाटों में रखा
    अनाज है
    जिसे सत्ता के
    भूख के हिसाब से
    बेहिसाब
    पीसा जाता है।
    ---
    बेहतरीन अभिव्यक्ति सर
    सादर।

    ReplyDelete
  6. सुंदर सराहनीय रचना ।

    ReplyDelete
  7. जी बहुत उम्दा रचना ।

    ReplyDelete
  8. सही !!बैचेन आत्मा अकेली नहीं भीड़ है पूरी।
    सुंदर सृजन।

    ReplyDelete
  9. सही कहा आम जनता ने यही हिसाब किताब का ठेका लिया है...सही गलत सब होके निकल जाते हैं...बस हिसाब किताब लगाते लगाते...
    बहुत सुन्दर सृजन।

    ReplyDelete
  10. बहुत सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  11. सच है सारी दुनिया तो चाँद आया -सूरज आया जानती है | उसके पीछे की राजनीति से उसका क्या लेना-देना ? सटीक हलकी -फुलकी सार्थक रचना |सादर

    ReplyDelete