4.10.09

सफेद कबूतर

घर की छत पर
बैठे थे
कई सफेद कबूतर
सबने सब मौसम देखे थे
सबके सब बेदम भूखे थे
घर में एक कमरा था
कमरे में अन्न की गठरी थी
मगर कमरा, कमरा क्या था
काज़ल की कोठरी थी।

एक से रहा न गया
कमरे में गया
अपनी भूख मिटाई
और लौट आया
सबने देखा तो देखते ही रह गये
आपस में कहने लगे
हम सफेद कबूतरों में यह काला कहाँ से आ गया!
सबने चीखा-
चोर!-चोर!
काला कबूतर दूर नील गगन में उड़ गया।

कुछ समय पश्चात
दूसरे से भी न रहा गया
वही भी कमरे में गया
अपनी भूख मिटाई
और लौट आया
सबने चीखा-
चोर!-चोर!
काला कबूतर दूर नील गगन में उड़ गया।

धीरे-धीरे
सफेद कबूतरों का संख्या बल घट गया
नील गगन
काले कबूतरों से पट गया।

एक समय ऐसा भी आया
जब काले कबूतर
घर की छत पर
लौट-लौट आने लगे
सफेद कबूतर
या तो कमरे में
या नील गगन में
उड़-उड़ जाने लगे।

जिन्होंने
कमरे में जाना स्वीकार नहीं किया
भागना स्वीकार नहीं किया
वे
कवि, गुरू, या दार्शनिक हो गये
सबको समझाने लगे-
कमरे में अन्न की गठरी है
मगर रूको
कमरा, कमरा नहीं
काज़ल की कोठरी है।

किसी ने सुना
किसी ने नहीं सुना
किसी किसी ने
सुना अनसुना कर दिया
मगर उनमें
कुछ चालाक ऐसे भी थे
जिन्होंने विशेष परिधान बना लिए
कमरे में जाकर भी
हंस की तरह
उजले के उजले रह गए

बात मामूली नहीं
संगीन है
उन्हीं की जिन्दगी
बेहद रंगीन है

उनके लिए
हर तरफ मजा ही मजा है
वे ही तय करते हैं
किसकी क्या सजा है
उनका
बड़ा ऊँचा जज़्बा है
जी हाँ
आज घर में
उन्हीं का कब्जा है।
जी हाँ
आज घर में
उन्हीं का कब्जा है।

(....यह कविता हिन्दयुग्म में प्रकाशित है।)

12 comments:

  1. कबूतरों के बहाने बहोत गहरी बातें कह दी आपने।
    Think Scientific Act Scientific

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  2. Bahut Barhia... aapka swagat hai...

    thanx
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  3. Achhe pratik ke sath bhav ka achha praktikaran. Badhai.

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  4. बहुत खूब ! बेहतरीन अभिव्यक्ति !

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  5. उनके लिए
    हर तरफ मजा ही मजा है
    वे ही तय करते हैं
    किसकी क्या सजा है
    उनका
    बड़ा ऊँचा जज़्बा है
    जी हाँ
    आज घर में
    उन्हीं का कब्जा है।
    जी हाँ
    आज घर में
    उन्हीं का कब्जा है।nice

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  6. wah kya baat kahi hai...

    sarthak vyang marm or vedna ki abhivyakti

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  7. बहुत ही गूढ़ बात कह दी अपने, हम आपके कायल हो गये । बहुत सुन्दर ।

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  8. बहुत बढिया लिखा आपने .. हिन्‍दी चिट्ठा जगत में इस नए चिट्ठे के साथ आपका स्‍वागत है .. उम्‍मीद करती हूं .. आपकी रचनाएं नियमित रूप से पढने को मिलती रहेंगी .. शुभकामनाएं !!

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  9. Wah Wah Kya Khub .....dil karata hai aapaki unglinyo ko choom lun.
    prem ballabh pandey

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  10. is khas post ke liye main Haits off karta hoon aapko

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