
क्या तेरा क्या मेरा पगले
चार दिनों का फेरा पगले
छोरी-छोरा छुट जाएंगे
उठ जाएगा डेरा पगले
पत्थर का दिल क्यों रखता है
तन माटी का ढेरा पगले
बिन दीपक ना मिट पाएगा
अंधियारे का घेरा पगले
सूरज सा चमका है जग में
जिसने तन मन पेरा पगले
मूरख क्यों करता गुरुआई
एक गुरु सब चेरा पगले
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