2.2.14

तोता और मैना


एक मैना पिंजड़े के तोते से बहुत प्यार करती थी। अकेले में पिंजड़े के ऊपर बैठकर ढेरों बातें करती। तोता मैना पर रंग जमाने के लिए मनुष्यों की बोली बोलता—जै श्री राम! जै श्री राम!’ मैना न समझती, न बोल पाती। तोते से मतलब पूछती। तोता कहता--‘मैं क्या जानूँ ? यह तो आदमी की बोली है, आदमी जाने। मेरे मालिक ने जैसा सिखाया वैसा मैने सीख लिया।

कई वर्षों तक मैना नहीं आई। तोता मैना की याद में बहुत दुःखी रहता था। एक दिन तोते की खुशी का ठिकाना न रहा। मैना पहले की तरह उड़ती हुई आई और पिंजड़े के ऊपर बैठ गई। तोते ने मैना पर भाव जमाने के लिए बोलना शुरू किया-नमो..नमो। इस बार मैना को आश्चर्य नहीं हुआ। वह भी कई वर्षों तक एक पंडित जी की कैद में रहकर आई थी। वहाँ एक दूसरा तोता था। जिसे पंडित जी बोलना सिखाते थे। उसने भी तोते पर रंग जमाने के लिए बोलना शुरू किया- गोपी कृष्ण कहो बेटू..गोपी कृष्ण। तोते को बहुत आश्चर्य हुआ। उसने भी इसका मतलब पूछा। मैना ने उत्तर दिया-मैं क्या जानूँ? यह भी आदमी की बोली है। इनकी बोली एक जैसी थोड़ी न होती है! जैसे आदमी वैसी बोली।

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26 comments:

  1. यह तो सरासर गलत बात है सर जी, लघुकथा का लालच देकर पूरा ग्रंथ पढ़ा दिया :)

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  2. तोता मैना की कहानी तो पुरानी पुरानी हो गई ......ऐसा एक ठो लिल्लन टाप गाना सुना करते थे जी ..जे तोता मैना कपल तो एकदम्मे नयका फ़ीलिंग वाला था :) :)

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  3. तोतों की बोली पालने वालों पर निर्भर करती है !!

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  4. हमें पता है हम भी तोते हैं !

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  5. "मैना ने उत्तर दिया-मैं क्या जानूँ? यह भी आदमी की बोली है। इनकी बोली एक जैसी थोड़ी न होती है! जैसे आदमी वैसी बोली।‘"
    सारी सम्भावनायें इसी में हैं कि मैना जानती है कि आदमी का सच क्या है।

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  6. जैसे लोग वैसी बोली ....
    :-)

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  7. शु्क्र है, मैना मेरे यहां नहीं आई वर्ना मैं उसे कुछ और ही लफंदर सि‍खा देता...

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    1. कार्टून बनाना सीख लेती।

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  8. पंडित विष्णु शर्मा के बाद आज पंडित देवेन्द्र पांडेय की यह कथा बिल्कुल सही नोट को हिट करती है! दिल खुश हो गया!! कमाल देवेन्द्र भाई!!

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  9. दोनों का टिकिट पक्का है। तोता का भी मैना का भी।

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  10. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन टेलीमार्केटिंग का ब्लैक-होल - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (03-02-2014) को "तत्काल चर्चा-आपके लिए" (चर्चा मंच-1512) पर भी है!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  12. :):) शुक्र है कि अच्छी बोली ही सीखी

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  13. जैसा आदमी वैसे बोली ... बात तो सही कही है ...

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  14. कोस कोस बदले पानी , दस कोस पर बानी

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  15. कहानी बहुत अच्छी लगी |

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  16. न जाने कितने तोता मैना प्रभु का नाम रटे जा रहे हैं बिना यह जाने कि उनका मर्म क्या है...गहरा संदेश देती बोध कथा !

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