2.10.10

सबसे अच्छे बापू...!


बापू
मैं जब भी आपकी तश्वीरें देखता हूँ
आप मुझे उतने अच्छे नहीं लगते वकील के कोट में
जितने अच्छे लगते हैं
धोती या लंगोट में !

दिल की बात सच-सच कह दूँ बापू !
आप सबसे अच्छे लगते हैं
पाँच-दस नहीं,
सौ-पचास भी नहीं,
पाँच सौ भी,
जब आते हैं....
हजार रूपए के नोट में !  

33 comments:

  1. सबके मन की बात कही आपने

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  2. हज़ार रूपये के नोट और धोती लंगोट ।
    वाह क्या मेल किया है ।
    बहुत सुन्दर विरोधाभास ।

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  3. बापू कहाँ -कहाँ अच्छे लगते हैं ...
    वाह ! क्या बात कही !!

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  4. सुन्दर भाव...
    गांधी जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं

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  5. गांधी जयंती में तो छोड़ देतें बापू जी को जनाब !

    चुटीली रचना, लिखते रहिये ...

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  6. :)
    gahri soch............yahin manav mann hai!!
    bapu ko naman!!
    aur aapko bhi dhanyawad!!

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  7. बहुत सुन्दर। राष्ट्रपिता को नमन।

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  8. ये अंदर की बात है देवेंद्र जी!!

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  9. बापू की सादगी आज कहाँ है .... १००० के नोट में डाल कर वो सादगी ही ख़त्म कर दी नई सरकार नें .... ये नेता भी तो बापू के नाम पर खा रहे हैं ...

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  10. दो अक्टूबर को जन्मे,
    दो भारत भाग्य विधाता।
    लालबहादुर-गांधी जी से,
    था जन-गण का नाता।।
    इनके चरणों में श्रद्धा से,
    मेरा मस्तक झुक जाता।।

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  11. आज सभी बापू के राग गा रहे है , जो सही नेता है उसे सब भुल गये.... आज के दिन ही जन्मे थे हमारे लालबहादुर-गांधी जी जो एक सच्चे नेता थे,आज के दिन मेरा इन दोनो को शत शत नमन

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  12. बापू के फोटो वाली हजार रुपये के नोटों की बरसात हो तो क्या कहने !

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  13. रूपये बापू के बिन भी अच्छे ही लगेंगे ! पर बापू कब ...?

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  14. वाह क्या बात कही । आज तो यही सच है। बापू जी व लालबहादुर शास्त्री जी को शत शत नमन। धन्यवाद।

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  15. एकदम सटीक व्यंग...... यही सच्चाई है.....
    बापू व शास्त्री जी को शत शत नमन। धन्यवाद।

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  16. क्या बात कही देवेन्द्र जी।

    वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि जब भी वोडाफोन के कैश पेमेंट के लिए कियोस्क पर जाता हूं तो वह बिना गाँधी वाली तस्वीरों को अंदर लेने में मना कर देता है...जैसे ही कोई दस का नोट या पांच सौ का नोट जिस पर गाँधी हों...ये तुरंत ले लेता है।

    मशीन भी गाँधी को मानती है शायद :)

    ( दरअसल वोडाफोन के कियोस्क में सेटिंग है कि बिना गाँधी वाली नोटों को एक्सेप्ट न करे, ताकि नकली नोट की संभावना कम से कम रहे )

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  17. बहुत ही भावपूर्ण रचना .... प्रस्तुति के लिए बधाई

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  18. मतलब यह है कि बिना गांधीजी का नाम लिए तो हमारा कोई भी काम नहीं चलता। आपकी रचना पढ़कर याद आया कि हिन्‍दुस्‍तान में रिश्‍वत भी गांधी को साक्षी मानकर ही दी जाती है। और लोग कहते हैं कि हमने गांधी को भुला दिया। वे तो हमारी रग रग में बसे हैं। उनकी फोटू वाले कागज ही तो हमें सब कुछ देते हैं।

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  19. सार्थक कविता. मै भी समर्पित करता हूँ अपनी ये लाइनें-
    देखता हूँ चुनावों में बंटते आपके फोटो वाले नोट,
    वह भी जेब में रखकर चलता है आपको ,
    जिसके दिल में है खोट.
    यह सब देख कर
    हम जैसों के दिलों को
    बार-बार लगती है चोट !

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  20. अच्‍छी प्रस्‍तुति .. बहुत सही !!

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  21. राष्ट्रपिता को शत शत नमन ।

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  22. वाह क्या बात...!!! राष्ट्र की मानसिकता ही लिख डाली आपने...! बहुत आभार.. देवेन्द्र भईया आपकी अक्वारियम घडी आपका भाई शेयर कर ले?

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  23. बहुत अच्छी प्रस्तुति

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  24. @S.M.HABIB..
    शौक से..मेरी कहाँ है...मैने भी किसी के ब्लॉग से उड़ाई है।

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  25. इस तमाचे की आवाज भी नही आती..बस गाल सहलाता खड़ा हूँ..गाँधी मुझे भी बार-बार याद आते हैं..एटीएम से निकलते गाँधी..डांस-बारों मे बरसते गाँधी..ईएमआई मे बंटते गाँधी..लाल गाँधी, हरे गाँधी, काले गाँधी..टेबल के ऊपर गाँधी..टेबल के नीचे गाँधी..बेड के नीचे बिछे गाँधी..स्विटजरलैंड मे हवा खाते गाँधी..सारा देश अब गाँधीमय हो गया है...मगर कोई बूढ़ा है जो अभी भी रात मे गलियों मे कहीं रोता है..बस आवाज नही आती...

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  26. आपने नोट से संबंधित जो जो बातें लिखी है सब नोट (NOTE) कर ली गई है .आभार

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  27. zabardast.........ye baat koi bechain aatma hi kah sakti thi.

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  28. :))

    http://liberalflorence.blogspot.com/

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  29. धोती और लंगोट फिर एक हजार का नोट ! ठीक ही है ............

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  30. बापू की "तारीफ़" में लिखा गया ये ब्लॉग मुझे पसंद आया.
    देख रहे हो बापू????
    धन्यवाद.
    WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

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  31. बापू की तारीफ़ बहुत अच्छी कविता है।
    पढकर बहुत अच्छा लगा
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

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