30.5.12

गंगा चित्र-6 ( गंगा दशहरा )


हरिश्चंद्र घाट




साधुओं की अड़ी


केदार घाट


पंचगंगा घाट


दशाश्वमेध घाट



32 comments:

  1. वाह अपाने तो घर बैठे ही यात्रा करवा दी

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  2. आज के दिन हम लोग गाँव में नीलकंठ पक्षी के दर्शन करते थे,पर अब यहाँ कहाँ ..?

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  3. बहूत खूबसूरत -आपतो प्रोफेसनल फोटोग्राफर हो गए !

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  4. संवाद की गंगा बने चित्र..

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  5. आपने ये सारे चित्र इतनी खूबसूरती से लिए हैं, की देख कर ही मन प्रसन्न हो गया..केदार घाट और दशाश्वमेघ घाट की तस्वीर तो मैं बस देखता ही रहा!! :)

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  6. आखिरी तस्वीर तो गज़ब है.

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  7. कृपया दूसरी तस्वीर के बारे में चर्चा करें !

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    1. यह तश्वीर भी गंगा घाट की है। इन साधूओं को सामने जलती लकड़ी पर खाना पकाते, खाते देखा हूँ। बीच वाले साधू की नाक सूंड़ की तरह निकली है। एक ही आँख दिखाई दे रही है। यह किसी रोग के कारण होगा जैसा लगता है। अधिक जानकारी नहीं है। हर एक तश्वीर, हर एक घाट का अपना रोचक इतिहास है। इच्छा है कि अलग-अलग जानकारी बटोर कर लिखूँगा लेकिन अभी तक तो अवसर नहीं मिला।

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    2. वो तो ठीक है मगर , साधुओं की अड़ी दो साईंयों के बीच पड़ी का कोई उल्लेख नहीं किया आपने :)

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  8. हमने सोने से पहले सन्देशा छोड़ा था , नि:संदेह तब आप सुहाने सपनों के पीछे भाग रहे होंगे
    अब जो सुबह फिर से वापस आये हैं , तब आप दूर कहीं टहलकर देह की चर्बी त्याग रहे होंगे

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  9. Mai Banaras me rah chuki hun....purani yaaden taza kar deen aapke chitron ne!

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  10. बहुत सुन्दर दृश्य... यादें ताज़ा हो गईं...

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  11. इन घाटों पर क्या क्या होता है , कृपया यह भी बताएं .

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    1. प्रत्येक घाटों के बारे में लिखने की मेरी भी इच्छा है। समय मिलने पर...

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  12. जितने सुन्दर और साफ़ चित्र हैं काश गंगा कों भी हम उतना ही साफ़ रख पाते ...

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  13. गंगादशहरे के मेले ने बचपन की स्मृतियों को एक बार फिर ताज़ा कर दिया।

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  14. खूबसूरत चित्र.... वाह!
    सादर।

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  15. बहुत ही सुन्दर चित्रमाला प्रस्तुत की है आपने
    आभार

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  16. लिखिए विस्तार से एक एक घाट के बारे में, अड़ी \ पड़ी (बतर्ज अली साहब) के बारे में, प्रतीक्षा रहेगी|

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  17. बहुत सुन्दर चित्र हैं बनारस के घाटों के। लिखिये कभी विस्तार से इनमे बारे में।

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  18. खूबसूरत चित्र ...घाटों के वर्णन की प्रतीक्षा हमें भी रहेगी !

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  19. बनारस वासियों के घट-घट में बसे है गंगा के घाट...मगर घाटों पर भई भीड़ संतन की तो नहीं दिख रही! बहरहाल, चित्र बहुत ही आकर्षक बन पड़े हैं !!

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  20. गंगा के घाट का नाम सुनते ही गंगा में विलीन होती विस्तीर्ण सीढ़ियाँ (हालाँकि वही सीढियां नीचे से ऊपर की ओर भी जाती हैं, किन्तु सदा ऊपर से नीचे जाती सीढ़ियों का ही स्मरण होता है) दिखाई देती हैं... मेरी तीन माओं में से एक गंगा माँ भी है, शायद इसीलिए उसके घाट उसकी खुली बाहों की तरह प्रतीत होते हैं.. पटना, बनारस और विन्ध्याचल... हमारे परिवार का अभिन्न अंग रहे हैं!!
    आपकी चित्रमाला वैसे भी मनमोहक होती है, यह तो एक आध्यात्मिक और सूफियाना श्रृंखला लगी!! मन गदगद हो गया!! पाण्डेय जी, आभार माता का दर्शन करवाने हेतु!!

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    1. आपके कमेंट से श्रम सार्थक लगने लगा..और आपको यहाँ देखकर बहुत खुशी हुई। एकाध महीने की दूरी तो मान कर चल रहा था।

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  21. बहुत घूमा हिन्दुस्तान ,अमरीका ,कनाडा ,काशी दर्शन रह गया ..दर्शन आपने करा दिया अब देखना रिहर्सल होगा सशरीर .. .कृपया यहाँ भी पधारें -

    शगस डिजीज (Chagas Disease)आखिर है क्या ?
    शगस डिजीज (Chagas Disease)आखिर है क्या ?

    माहिरों ने इस अल्पज्ञात संक्रामक बीमारी को इस छुतहा रोग को जो एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुँच सकता है न्यू एच आई वी एड्स ऑफ़ अमेरिका कह दिया है .
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    गत साठ सालों में छ: इंच बढ़ गया है महिलाओं का कटि प्रदेश (waistline),कमर का घेरा
    साधन भी प्रस्तुत कर रहा है बाज़ार जीरो साइज़ हो जाने के .

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

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  22. तमाम चित्र बोलते से है अपनी सहज स्वाभाविकता में शुक्रिया .. .कृपया यहाँ भी पधारें -

    शगस डिजीज (Chagas Disease)आखिर है क्या ?
    शगस डिजीज (Chagas Disease)आखिर है क्या ?

    माहिरों ने इस अल्पज्ञात संक्रामक बीमारी को इस छुतहा रोग को जो एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुँच सकता है न्यू एच आई वी एड्स ऑफ़ अमेरिका कह दिया है .
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    गत साठ सालों में छ: इंच बढ़ गया है महिलाओं का कटि प्रदेश (waistline),कमर का घेरा
    साधन भी प्रस्तुत कर रहा है बाज़ार जीरो साइज़ हो जाने के .

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

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  23. इन चित्रों ने संस्कृति और समाज को यादों में उकेरने का कार्य किया है सुखद लगा आपका प्रयास ...../

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  24. फोटो सुन्दर हैं.ब्रह्माघाट का भी फोटो देखना चाहता हूँ इन घाटों में.

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  25. आपके चित्रों के माध्यम से हम भी बनारस पहुँच जाते हैं

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