27.11.16

सुबह की बातें-3

धमेख स्तुप के ऊपर 

कौए अधिक थे
कबूतर कम
तोते
कर रहे थे टांय-टांय
कर रहे थे भगवान से प्रार्थना
कह रहे थे...
कौए बढ़ रहे हैं, कबूतर उड़ रहे हैं
कुछ करो!
यह अच्छी बात नहीं!

हंसने लगा
उगता सूरज
बुद्ध नहीं,
यह लड़ाई
कबूतरों को ही लड़नी है
तुम भगवान से प्राथना मत करो
आलोचना मत करो
उत्साहित करो
कबूतरों को
कौए भाग जायेंगे.



2 comments:

  1. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (29-11-2016) के चर्चा मंच ""देश का कालाधन देश में" (चर्चा अंक-2541) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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