25.4.19

बनारस की गलियाँ-8

बनारस की एक गली
गली में चबूतरा
चबूतरे पर खुलती
बड़े से कमरे की खिड़की
खिड़की से झाँको
कमरे में टी.वी.
टी.वी. में दूरदर्शन
एक से बढ़कर एक
सीरियल
हम लोग, बुनियाद, नीम का पेड़
सन्डे की रंगोली, चित्रहार, रामायण..

सुबह हो या शाम
तिल रखने की खाली जगह भी न होती थी
चबूतरे से कमरे तक
जब शुरू होते थे सीरियल

तब
सबके पास नहीं होती थी
टी.वी.
सन्नाटा पसर जाता था
शेष गली में।
.............

3 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (26-04-2019) को "वैराग्य भाव के साथ मुक्ति पथ" (चर्चा अंक-3317) (चर्चा अंक-3310) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. वाह!बहुत खूब!

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