12.12.15

फर्क

जब कोई दूसरा रास्ता न हो...
आसान है
राह में झरे फूलों को देख हर्षित होना
और...
रौंदते हुए निकल जाना!
कठिन है
ठहरना,
झुकना,
पंजों के बल बैठ
एक-एक फूलों को
हौले-हौले चुनना
और उन्हें
दोनों हाथों से
अंजुरी-अंजुरी उठाकर
एक किनारे
माटी को सुपुर्द करने के बाद
आगे बढ़ना।
रौंद कर चले जांय या सहेज कर
आपकी मर्जी
फर्क
न फूलों पर पड़ेगा
न पौधों पर।

3 comments:

  1. magar aap par padegaa ( repeating ).

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  2. फूलों को रौंदने के लिए पत्थर का दिल चाहिए..और सहेजने के लिए...

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    1. मनुष्य का क्योंकि मनुष्य में दिल और सोच दोनों होने की सबसे ज्यादा संभावना है।

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