चलिए आज आपको वाराणसी में तुलसी मानस मंदिर और संकट मोचन मंदिर के बीच स्थित त्रिदेव मंदिर के दर्शन कराते हैं। आज रविवार की शाम त्रिदेव मंदिर में सावन के श्रृंगार की अलौकिक झांकी सजाई गई। वृंदावन के फूल बंगला की कृत्रिम झांकी के साथ मंदिर के मध्य भाग में कृत्रिम झील बनाई गई थी। झील के बीचों बीच रंग बिरंगे फूलों से सजे झूले पर राधा-कृष्ण की झांकी सभी का मन मोह रही थी। बर्फ की सिल्लियों से परिक्रमा पथ सजाया गया था। हालांकि मैं जब वहाँ पहुँचा तो बर्फ गल चुका था। झील में तैरते बतख और झूले के उपर बैठे सफेद कबूतर प्यारे लग रहे थे। मंदिर की हरियाली देखते ही बनती थी।
प्रवेश द्वार
प्रवेश द्वार की सीढ़ियाँ चढ़ते ही यह दृश्य दिखा।
झील के बीचों बीच फूलों से सजे झूले पर बैठे राधा-कृष्ण
लाइटिंग की व्यवस्था भी गज़ब की थी।
दायें से खींची गई यह तश्वीर।
झूले के ऊपर बैठे दो कबूतरों के लिय यह तश्वीर बायें से।
हमेशा विराजमान रहने वाले त्रिदेव.. (राणी सती)
सालासर हनुमान
प्रभु खाटू श्याम
बतख के जोड़े कभी तैरते कभी चकित हो, मनुष्यों की लीला देखते रहते।
कल सावन का आखिरी सोमवार है। भोलेनाथ के दर्शन भी करते जाइये।
इस मंदिर की सबसे अच्छी बात यह लगी कि यहाँ फोटो खींचने की कोई मनाही नहीं थी। सभी खूब फोटो खींच रहे थे। इतनी सजावट के बाद यदि फोटो खींचने पर प्रतिबंध लगा दिया होता तो मैं आपको ये दृश्य कैसे दिखा पाता! इसके लिए व्यवस्थापकों का तहे दिल से आभार। मंदिर में जब तक रहा पूरे समय राधे-राधे-राधे.. का कर्ण प्रिय भजन आनंदित करता रहा।