14.10.12

बाजरा

यह चित्र सुबह फेसबुक में पोस्ट किया था। कुछ देर पहले देखा उस पर सलिल भैया (चला बिहारी ब्लॉगर बनने ) ने पूछा, "बा जरा कि भरल बा?" उनको जो उत्तर दिया उसी मूड में यहाँ लिख दिया। इसे एक प्रयोग के रूप में ही लिया जाय। गलती हो तो बताया जाय, सुधार किया जाय। चित्र देखिये, फिर नीचे कविता....


बा जरा                  

बा जरा

ठूँठ में 

बाजरा

ढेर तs

चुग गये

ई चरा

ऊ चरा।




कपार पे                             

हाथ दे

ताकता

टक टका

ना मिला

इक टका

ना दिखा

रोटका।


जे जबर

ऊ चरा

खेत कS

बाजरा                                  

आस मन

में धरा

बा जरा

बा जरा।

...................

चरा-चिड़िया

रोटका-बाजरा।

24 comments:

  1. ढेर तS
    चुग गये
    ई चरा
    ऊ चरा...

    भरल बा ?...

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  2. सब से
    ब ढ़ि या
    खे त का
    बा ज रा ! :)

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  3. बहुत सुन्दर

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  4. बाजरा, अब बा जरा-ज़रा :)

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  5. सब मिनी कविता में लग गये। हमहूं!
    हरा
    भरा!
    बा
    जरा!!!

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  6. हाजरा हाजरा हाजरात :-)

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  7. बहुत सुघर बा बाजरा .
    अबही त ह हराभरा

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  8. वाह पाण्डेय जी, बहुत खूब।

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  9. जबरदस्त भाई जी-

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  10. नीचे के दो चित्र आत सुबह के हैं। इन्हें जोड़ने में काफी वक्त लग गया और ठीक से सेट भी नहीं हुआ।

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  11. वाह वाह वाह वाह....... बस वाह

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  12. जरा जरा
    नहीं झरा
    हरा भरा बाजरा।
    मुस्कुरा जरा-जरा
    गज़ब खिला ये बाज़रा।
    ढोकला
    खाखरा
    गोरबन्द बाजरा।
    गिर गया हूँ
    भरभरा
    हाय हाय बाजरा।

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  13. ए हो पाण्डे जी! बाजरा के खेत मंs खिलखिलावतsड़ पर हमरा के ई बतावs ...अतना खुस रहे बाला आदमी के आतमा बेचैन कइसे हो गsइल?

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  14. कमाल है.....
    बा ज़रा
    बाजरा
    तो
    खा ज़रा.

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  15. अच्छा है फ़ोटो कविता गठबंधन।

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