29.10.12

अस्सी घाट, शरद पूर्णिमा और चाँदनी की पदचाप





































सभी तस्वीरें आज शाम की हैं। दूसरी तस्वीर में आकाश दीप जल रहा है। आज से तुलसी के पौधे और गंगा घाट के किनारे दीप दान प्रारंभ हो चुका है।  तीसरी तस्वीर में एक पुरानी नाव दिखाई दे रही है जिस पर आजकल चाय वाला अपनी दुकान लगाता है। अंतिम तस्वीर थोड़ी हिली न होती तो मस्त आती। इसके हिलने का अफसोस तो है लेकिन फिर भी आपको दिखाने का मोह नहीं छोड़ पा रहा हूँ। आज शरद पूर्णिमा है। खीर पक रही है। चाँदनी अपनी संपूर्ण मिठास के साथ उसकी प्रतीक्षा में है। हमारी शुभकामना यह कि आपकी खीर बिल्ली से बची रहे।


25 comments:

  1. :) हमारी खीर बिल्ली से बच गयी है, और हमेशा की ही तरह फोटोज बेहद पसंद आई, मैं कभी बनारस नहीं घूमी हूँ, लेकिन वो मेरी list में ऊपर आता है, और अगर इसी तरह आपकी फोटोस के दीदार होते रहे, तो जल्द ही यहाँ का टिकेट कटाना पड़ेगा।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बची रहे तब न, खानी तो कल सुबह है। :) बनारस घूमे बिना स्वयम् तृप्ति भी बेचैन रहती है। आपको तो होना ही है। :)

      Delete
  2. बहुत खूबसूरत चित्र .... शरद पूर्णिमा और गंगा का किनारा .... बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  3. दुसरकी वाली धाँसू है !

    ReplyDelete
  4. अमृत वर्षा से हुई, श्वेत खीर अभिसिक्त ।

    छक कर खाई है सुबह, उदर नहीं है रिक्त।

    उदर नहीं है रिक्त, टेस्ट मधुमेह कराना ।

    भले चित्र अवलोक, चित्त में इन्हें समाना ।

    चित्रकार आभार, परिश्रम का फल पाओ ।

    स्वस्थ रहे मन-बदन, और भी चित्र दिखाओ ।।

    ReplyDelete
  5. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    ReplyDelete
  6. bahut hi khubsurat chitra hain ....devendra jee...

    ReplyDelete
  7. अध्यात्म की चाँदनी..

    ReplyDelete
  8. वाराणसी(काशी)एक चिरंतन नगरी ,प्रलयकाल में भी विनाश नहीं होता जिसका -
    फ़ोटो आकर्षक हैं!

    ReplyDelete
  9. तस्वीरों ने स्वाति की बूंदें दे दीं

    ReplyDelete
  10. शरद पूर्णिमा और खीर .... वाह

    ReplyDelete
  11. किलासिकल तस्वीरें .
    कहीं चाँद, तो कहीं विद्युत् शमा -- कहर बरपा रहे हैं.

    ReplyDelete
  12. किलासिकल तस्वीरें .
    कहीं चाँद, तो कहीं विद्युत् शमा -- कहर बरपा रहे हैं.

    ReplyDelete
  13. सभी चित्र बहुत सुन्दर।

    ReplyDelete
  14. पुरानी नाव को और-और येंगल में दिखाइये.

    ReplyDelete
  15. पर यह रहस्य न खुला कि मठाधीश कुत्ता क्यों बना?

    ReplyDelete
    Replies
    1. रहस्य गहरा लगा, रोचक लगा तभी तो यहाँ साझा किया कि आप जैसे गुरूजन इसको सुलझाने में सहायता प्रदान करेंगे। :) वैसे डा0 अरविंद मिश्र जी के उत्तर से इस निष्कर्ष तक पहुँचा हूँ कि जो पद सेवा के लिए बना हो उसके मुखिया को उससे धनार्जन नहीं करना चाहिए। लेकिन मठाधीश कुत्ता क्यों बना, यह तो रहस्य बना ही हुआ है। :)

      Delete
  16. बहुत ही खूबसूरत तस्वीरें हैं ।

    ReplyDelete
  17. यही तो मैं ढूंढ रिया था -बहुत आभार इस शीतलता को हम सब तक पहुँचाने का

    ReplyDelete
  18. अद्भुत ..
    क्या दृष्टि है

    ReplyDelete
  19. अद्भुत...अस्सी घाट पर मैंने भी गंगाजी की आरती देखा है...बगल में ही BHU है|
    यहाँ से दो चित्र लिया है हाइगा के लिए|

    ReplyDelete