16.10.12

टी वी मत खोलना....



सजने लगे पंडाल
गलियों में
उत्साहित हैं बच्चे
गा रहे हैं झूमकर...
"ए हो!
का हो!
माता जी की
जय हो।"

बढ़ने लगी भीड़
मंदिर में
लगने लगे मेले
सुनाई पड़ रहा है भजन..
"या देवी सर्वभूतेषु
मातृ रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमो नमः।"

खिलने लगीं
कुमुदिनियाँ
फूलने लगे
कास
पियरा चुकी हैं
धान की बालियाँ
तैयार है
पकी फसल
गा रहा है मन...
"मेरे देश की धरती
सोना उगले
उगले हीरे-मोती
मेरे देश की धरती।"

अच्छा है सबकुछ
बस भगवान के लिए
टीवी मत खोलना !
खोल भी दिया
तो समाचार मत देखना !
सुनाई देती हे 
वही चीख पुकार...
भ्रष्टाचार, बलात्कार, हाहाकार।
..................................................

42 comments:

  1. ...नहीं खोलूँगा जी मगर शहर में और देखूँगा क्या ?

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  2. बात तो सही है...
    चारो ओर भ्रष्टाचार ने परेशान कर दिया है..
    कुछ दिन मन को शांति दे..
    नवरात्री की शुभकामनाएँ...
    ;-) :-) :-) :-)

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  3. चीक पुकार तो बिना टीवी के सुनाई पड़ती हैं....
    हाँ इन दिनों माता के भजनों ने तसल्ली दे रखी है...

    अनु

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  4. सच्ची!!! जाने कबसे खोला भी नहीं....

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  5. वाह , हमेशा की तरह लाजबाब पांडेयजी।नवरात्र का स्वागत और हालात के खस्ताहाल दोनों का बखूबी चित्रण।

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  6. सौ प्रतिशत सहमत-
    करीना सैफ-
    और बदरा सलमान-

    जय माँ
    नमन -

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  7. हाँ सच्ची! बिलकुल नहीं खोलना है टी वी...

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  8. समाचार तो देखना ही पडता है काहे कि मै थोड़ा राजनैतिक हूँ न,,,,,

    नवरात्रि की शुभकामनाएं,,,,

    RECENT POST ...: यादों की ओढ़नी

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    1. टीवी तो प्रतीकात्मक है। असल बात हालात की अभिव्यक्ति है। आप जैसे कवि हृदय लोग भी राजनीति में है यह सुखद है।

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  9. टीवी... समाचार.. भ्रष्टाचार???? देवेन्द्र जी! क्षमा चाहता हूँ, ये किन वस्तुओं के नाम लिए हैं अपनी कविता में.. कृपया उनके अर्थ कविता के अंत में अवश्य दें ताकि समझने में आसानी हो!!
    हम तो बस कविता की धुन में रमे "जयंती, मंगला, काली.." पढ़ रहे हैं.. मगन हैं पकी हुई अनाज की बालियों में..
    जय दुर्गा मैया की!!

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  10. सत्य से परे सजते हुए पांडाल .....
    देवी हैं अंतर्ध्यान
    मूर्ति है निष्प्राण
    फिर भी मचा है शोर- नमस्तस्यै ....

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    1. jai mata ....ples watch my blogs...

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  11. माताजी की जय हो. :)

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  12. समाचार देखें या न देखें, आँखें बंद करने से हकीकत तो नहीं बदलने वाली
    हाँ, हमारे देश में अच्छा है इतने सारे त्यौहार हैं कि माहौल बदलने का बहाना मिलजाता है।
    नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं !!

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    1. हकीकत कहाँ बदलती है? समाचार देखे बिना कौन रह पाता है? यह तो टीवी, समाचार के माध्यम से, प्रतीकात्मक रूप से हालात को अभिव्यक्त करने का प्रयास है। हाँ, चैनलों में जो खबर की गदर मचती है, एक ही समाचार को बार-बार आधे-आधे घंटे तक सुनते रहना पड़ता है, लम्बी बहस सुननी पड़ती है, उससे तो मन ऊब ही जाता है। पहले 15 मिनट का समाचार आता था। सभी ध्यान लगाकर सुनते थे। देश-विदेश के सभी महत्वपूर्ण समाचार मालूम हो जाते थे। अब तो एक घंटे टीवी देखो फिर भी पता चलता है कि अमुक समाचार तो छूट ही गया।

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  13. बहुत खूब....|

    नवरात्री कि हार्दिक शुभकामनाएँ |
    सादर नमन |

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  14. भ्रष्टाचार, बस? बलात्कार नहीं.

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    1. संशोधित कर दिया। अब ठीक है?

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  15. देवेन्द्र पांडे जी गर खोल लिया टीवी तो सुबहे बनारस का मज़ा जाता रहेगा .चर्चे और चरखे सब जीजाजी के हैं .अभी भी हरीश रावत जी मासूमियत से

    अशोक खेमका को कह रहें हैं -लोकतंत्र में कौन किसको मरवाता है .मरवा सकता है .बेचारे ने यही तो कहा ,चाहे आप मुझे टर्मिनेट करदो या मरवा दो -मैं

    सच को सच कहूंगा .भारत की प्रशासनिक सेवा में होने का मुझे गर्व है ,मेरी निष्ठा इस देश के साथ है किसी सरकार के साथ नहीं है न मैं ने उसकी नीति

    के विषय में कुछ कहा है .मेरा काम है नियमानुसार काम करना वह मैं करता रहूँगा .यह वही अधिकारी है जिसके 20-21 साला सेवा में 42 -43 तबादले

    हो चुके हैं ईमानदार होने की वजह से .

    ज़ाहिर है उन्हें अपनी जान का ख़तरा है .आप कहतें हैं लोकतंत्र में कौन किसको मारता है हम बतलातें हैं -

    प्रवीर देव भंज देव ,अलवर के राजा (आपने जोंगा जीप का विरोध किया था ),नागरवाला (आपात काल के दौरान मरवाए गए थे ,माताजी ने 70 लाख

    रुपया बैंक से अपने हस्ताक्षर करके निकाला था नागरवाला पुष्टि को तैयार थे .),श्यामा प्रसाद मुखर्जी साहब ,सभी मरवाए गए थे इसी लोकतंत्र में .अब

    केजरी -वार (केजरीवाल नहीं

    )सरकार के गले की हड्डी बना है .

    मैं सुबहे बनारस को रसहीन क्यों बनाऊं ?

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  16. सच मैं भी यही करता हूँ ...

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  17. सही कहा है आपने ।

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  18. प्रतीकों के माध्यम से आज के हालात बयान करती रचना ....

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  19. पहले ध्यान दिया होता इन खबरों को तो आज इनकी बाढ़ सी नहीं आ रही होती इन खबरों की ।

    हमारे घर के निचे ही देवी का पंडाल बना है बिटिया रानी देखने गई और जोर से कहा देवी बाप्प मोरिया :))

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  20. दो बात और कहनी थी अपने ब्लॉग पर ताला लगा दिया है किसी कारन कुछ कॉपी करना हो तो बड़ा मुश्किल होता है दुसरे आप की पिछली पोस्टो को देखना हो तो blog archive नही है उसे कैसे देखेंगे , मुक्ति जी वाली पोस्ट का जिक्र किया है अपनी पोस्ट में बिना आप की आज्ञा के ।

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    1. आप फीड सब्स्क्राइब करें और मजे से कॉपी पेस्ट करें!
      सजने लगे पंडाल
      गलियों में
      उत्साहित हैं बच्चे
      गा रहे हैं झूमकर...
      "ए हो!
      का हो!
      माता जी की
      जय हो।"

      बढ़ने लगी भीड़
      मंदिर में
      लगने लगे मेले
      सुनाई पड़ रहा है भजन..
      "या देवी सर्वभूतेषु
      मातृ रूपेण संस्थिता
      नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै
      नमो नमः।"....

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    2. निरर्थक है ब्लॉग पर ताला लगाना! :-)

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    3. ताला तो एक बार जायसवाल जी के विजेट को पढ़कर लगा लिया था। उसमें एक भागता हुआ आदमी भी था। भागते हुए आदमी को तो भगा दिया लेकिन इसे हटाने नहीं आ रहा है। आपने ताला तोड़ने की बुद्धि सिखा कर ताला लगाना तो बेकार ही कर दिया।:) वैसे यह फीड सस्क्राइब कैसे होता है?:)

      अंशुमाला जी, खूब कापी पेस्ट कीजिए, जो मन करे ले जाइये, मेरा कुछ भी नहीं है। सब इसी जगत का अनुभव है। काम का है तो जितना फैले उतना अच्छा।

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    4. देवेन्द्र जी

      आप ने खुद ही कहा की थोड़ी खेती बाड़ी आप भी सहेज लीजिये और अपने दरवाजा पर ताला लगाया हुआ है तो कैसे सहेजे :) असल में मुझे मुक्ति जी के फेसबुक की टिप्पणी को आप के ब्लॉग से लेना था जो नहीं ले पा रही थी और उस पोस्ट पर पहुँचने के लिए भी मशक्त करनी पड़ी क्योकि आप के ब्लॉग पर आप की पिछली पोस्टे दिखती ही नहीं है , संभव है तो ब्लॉग आर्काइव भी लगा ले ।

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  21. या देवी सर्वभूतेषु, भ्रांति रूपेण संस्थिता...

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  22. http://bulletinofblog.blogspot.in/2012/10/blog-post_17.html

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  23. सोने की जगह पाथर उगल रही है..

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  24. पता नहीं लोग लाउडस्पीकर लगा कर पूजा क्यों करते हैं !

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  25. कई महिला ब्लागर टी वी बहुत देखती हैं -मैंने एक को अभी अभी टोका तो उन्होंने कहा हाँ देखती हूँ ! जैसे यह कहना चाह रही हों क्या बिगाड़ लेगें ?
    काश आपका उत्सवी सन्देश उन तक पहुँचता तो कितना जन कल्याण होता !

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  26. बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही भावनामई रचना.बहुत बधाई आपको .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये

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  27. टेलीविजन खुल गया है। देख रहे हैं कि एस.पी.सिटी एक लाख की घूस लेते गिरफ़्तार।

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  28. आपकी सलाह सर माथे पर!
    (वैसे भी ब्लॉग से फ़ुरसत मिले तब ना ...! :))

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