1.7.12

गंगा चित्र-7


आज रविवार है। गंगा मैया के दर्शन किये बहुत दिन हुए। सोचा आज मार्निंग वॉक छोड़ गंगा वॉक किया जाय। खेल में शतरंज और घुमक्कड़ी में गंगा के घाट, ताजगी के मामले में दोनो का ज़वाब नहीं । जितनी बार भी गंगा जी गया एक नया एहसास, एक नई ताजगी लेकर लौटा हूँ। हर बार नये दृश्य देखने को मिलते हैं। आइये आज की कुछ ताजा तश्वीरें दिखाता हूँ...

(1) सुबह के साढ़े छ बज चुके हैं। सूर्योदय हो चुका है। नावें खुल चुकी हैं। पर्यटक सन राइज का आनंद लेकर  घाट किनारे बने लॉजों में लौटने की तैयारी में हैं। नदी किनारे तैयार हो रही नाव की बेचैनी समझी जा सकती है। कब तैयार हो और गंगा मैया की लहरों में घूमने का मजा मिले। 


(2) मढ़ी के ऊपर बिखरे दाने चुगते परिंदे।


(3) दशाश्वमेध घाट पर उमड़ी भक्तों की भीड़। आज कोई विशेष पर्व नहीं है। यह रोजमर्रा की जिंदगी है।


(4) केदार घाट के सामने दक्षिण भारतीय भक्त और दक्षिण भारतीय पंडा। मिनी भारत की छवि देखनी हो तो गंगा के घाटों का नज़ारा लीजिए। सभी धर्मों, संप्रदायों की मिली जुली संस्कृति का नजारा दिखेगा। शायद ही कोई राज्य हो जिसका प्रतिनिधित्व बनारस के घाट न करते हों।

(5) यह अनूठा दृश्य दिखा। दक्षिण भारतीय महिलाएँ और पुरूष दोनो सर मुढ़वा कर स्नान के बाद तैयार होते हुए।


(6) इन दो विदेशी युवतियों को शांत भाव से गंगा को निहारते देखा।


(7) लौटा तब भी ये लोग यहीं बैठे मिले।


(8) घाट किनारे बसे युवक तो रोज लेते ही हैं तैराकी का मजा।


(9) हरिश्चंद्र घाट के पास यह मुर्गा भी दिखा। मसान भूमि पर  इस मुर्गे के होने का रहस्य तो आलसी ही सही  ढंग से बता सकते हैं। कहीं यह किसी तांत्रिक की साधना का सामान तो नहीं!


स्थान. समय और फोटूग्राफर तो आप जान ही गये। दिनांक भी पोस्ट लिख ही देगा।..नमस्कार।



42 comments:

  1. बाभैया ज्ञानदत्त जी भी पीछे छूटे-आगे बढ़ चला अपना यह गंगा का छोरा आनंद:)

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    1. जो भी कहिये , मामला पाण्डेय से पाण्डेय तक ही तो सीमित है !

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    2. हा हा! गंगा माई का पट्टा पांड़े लोग लिखाये हैं! :-)

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    3. दोनों पांडे को साष्टांग प्रणाम ...

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    4. Bade bhayi, kahe sharminda karte hain? apnavala pranam bhi Agraj Gyandutt ji ke sri charno me samarpit karta hoon. Mujhhe to Apki SHUBHKAMNAYEN hi chahiye.

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    5. पांडेजनो को परनाम

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  2. आज तो सुबह सुबह बनारस का गंगा घाट घुमा दिया ... सुंदर चित्र

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  3. पक्षी दाना चुग रहे, मुर्गा है तैयार ।

    बारी गंगा-लाभ की, जाना सागर पार ।

    जाना सागर पार, बनारस घूम सकारे ।

    हो जाए उद्धार, मनौती गंग किनारे ।

    मानव देश-विदेश, आय के महिमा जाना ।

    खाय उड़े परदेश, आत्मा पक्षी दाना ।।

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    1. वाह! रविकर कविराज कुंडली गज़ब निकाली
      मुर्गा है तैयार! बतिया लिख दी मन वाली।:)

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  4. गंगा के किनारे,
    शरण पाते सारे..

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  5. आपके चित्र सहज ही पहुंचा देते हैं इस बनारसी को बनारस
    अद्भुत

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  6. सुन्दर चित्र , कबूतरों तक बात ठीक थी पर स्वस्थ मुर्गे का चित्र डाल के आपने मित्रों की हिंसक प्रवृत्तियों को प्रोत्साहन दिया है / जगाने की कोशिश की है !

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    1. शायद आप सही कह रहे हों.. रविकर जी भी कह रहे हैं..मुर्गा है तैयार! लेकिन नज़र गड़ाने से पहले सावधान होने की जरूरत है। मुर्गा किसी तांत्रिक का लगता है। :)

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    2. साथ में उसे भी खिला लेंगे :)

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    3. घोर - अघोर सब सत्य/शास्वत है यहाँ पर ...

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  7. क्या बात है!!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 02-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-928 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  8. कबूतरों और मुर्गे साथ
    सुबह सुबह गंगा घाट ,
    साथ में विदेशी साथ
    पाण्डे जी , क्या बात !

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  9. आज दिन सफल हो गया ... सुबह सुबह का गंगा जी का नज़ारा देख लिया ... दर्शन हो गए ... जय राम जी की ...

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  10. जय हो गंगा मैया की ...

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  11. सुन्दर मनोरम दृश्य... सचमुच गंगा मैया का दर्शन ताजगी से भर देता है...

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  12. गंगाजी का अपना आकर्षण है चाहे फिर वह गढ़ गंगा हो या हर की पौड़ी .बनारस के घाटों का आँखों देखा हाल सजीव कर दिया आपने .बहुत सुन्दर है . बहुत बढ़िया प्रस्तुति .. .कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai

    रविवार, 1 जुलाई 2012
    कैसे होय भीति में प्रसव गोसाईं ?

    डरा सो मरा
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  13. बहुत सुन्दर चित्र , आखिर मेरा जन्म स्थान जो है :)

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  14. कड़कनाथ मुर्गा बहुत जोरदार है।

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  15. मनोरम चित्र,

    क्या ये मुर्गा वही तो नहीं जिसका जिक्र काशी के अस्स्सी में है...
    खैर मुर्गा महाराज को अमरत्व तो प्राप्त होगा नहीं.

    बदिया लगा जी - लगे हाथ हमने भी २ बूँद पानी सर पर छिड़क कर हर हर गंगे बोल दिया ...:)
    रुका नहीं जा रहा था भाई :)

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    1. ऊ तो गया सिंह के पिता जी थे जिसे राम जी राय खाय चबा गये। ई मसान में मिला है। को जाने पुनर्जन्म हुआ हो। अभहीं फोटू हींचे हैं अता पता लगाना ही पड़ेगा ई आया कहाँ से!:)

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  16. बोल गंगा माई की जै

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  17. ओह पूर्व टीप लगा है गंगा में गोता लगाने गई .... निकाल लाना (स्पैम से) पाण्डेय जी.

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  18. सुंदर मोहक सैर....
    जय गंगा मैया की...

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  19. banaras kabhi jana nahi hua...ghanton ko ghoomkar dekhkar bada accha sa lag raha hai....

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  20. बहुत सूंदर मुर्गा भी एक जरूरी था अंत में ।

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  21. आपकी इस पोस्ट के बहाने हमने भी आज बनारस का घांट घूम लिया...जय हो मैया की... आभार

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  22. सुन्दर चित्र

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  23. बहुत सुन्दर! अच्छा लगा देखकर!

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  24. चित्र भी गंगा की बदहाली को वयां कर रहे हैं ....हम भी कितने भोले हैं जिसे हम बड़ी श्रद्धा से पूजते हैं ....जिसे हम प्राण रक्षक मानते हैं ....उसके साथ ऐसा खिलवाड़ .....! अब इसे अद्भुत न कहें तो क्या कहें .....??????

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  25. वैसे तो अभी गंगा नहाये नही मगर यहाँ देख कर ही आनन्द आ गया। धन्यवाद।

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    1. चित्र देखने में जिदनी साफ लगती हैं गंगा उतनी हैं नहीं।

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  26. गंगा किनारे के विभिन्न चित्र अपनी ही कहानी कहते हैं.

    ...पण्डे और मुर्गे का चित्र एक साथ देखकर ताज्जुब नहीं हुआ,पण्डे तो शिकार की तलाश में रहते ही हैं.

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  27. ए हो मर्दे! ई काहे नईं खे कहत कि अपने घर के मुर्गा हौ, सैर कराये खातिर लइले हौ। छिपाय के कौनो ज़रूरत नईं खे, हम कुल राज जानतनी। बाकी गंगाघाट के सैर कराये खातिर हमार धन्यवाद ले के जइह। खाली जइब त बहुरिया से ढेर पिटइब, बूझ ल।

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  28. बेहद सुन्दर चित्र.

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